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राष्टियता के सर्टीफिकेट का ठेका
राष्टियता के सर्टीफिकेट का ठेका
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राष्टियता के सर्टीफिकेट का ठेका
आर एस एस ने आजकल दूसरों को राष्टियता के सर्टीफिकेट बाँटने का ठेका ले रक्खा है । देश की आजादी में जिनका योगदान नग्णय है, वह दूसरो को राष्ट्रीयता का पाठ पड़ाते फिर रहे है ।बैठे बिठाये मिली आजादी को पावर में आते ही स्वयभू राष्ट् भक्त बन बैठे । किसी को पाकिस्तान भेजने के फतवे जारी करते हैं किसी को "भारत माता की जय" नां बोलने पर "देश द्रोही" कह कर अपमानित करते है । तुम्हारी तो कई मातायें है । इनकी माता की हम जय क्यो बोलें भई ?
हमे ईनसे देश भक्ति का प्रमाण पत्र नही चाहीये ,सारी दुनियाँ जानती है कि देश की अजादी में इनको छोड कर हर जात और मजहब के लोगों ने हिस्सा लिया । हिन्दू, मुसलिम , सिक्ख सभी का खून इस देश की बुनियाद में पड़ा ।यह हिन्दूयों के भी ठेकेदार बन बैठे हैं जबकि हर हिँदू आर ऐस ऐस की सोच के हक में नही । वास्तव में यह वह मनुवादी हैं ,जिन्होने हमेशां ही शूद्रो और कम गिन्ती वाली कौमौ पर अत्याचार किया ।
सिक्खो को भी इन्हो ने हिन्दू समाज का एक हिस्सा साबित करने की असफल कोशिश की जबकि लगभग एक सदी से सिक्खो के महान विदवान ने एक इतिहासिक पुस्तक लि्ख कर इनको चेतावनी दी थी कि " हम हिँदू नही" ।
आज भी जह एक सदी पुरानी पुस्तक सिक्खो मे बहुत लोक प्रिय है। इन्हो ने सिक्खो के वारे में एैसा कूड़ प्चार किया कि मुस्लिम भाई भी सिक्खो को अपना दुशमन समझने लगे।
भारत माता की जय बोलने का फतवा देने वाले इन कथित राष्ट् भग्तो को कोई सँप्रदायिक कहे तो इनको बहुत मिर्च लगती है, लेकिन भारत माता के इन सपूतों ने तो भारत माता के हाथ से देश का तिरँगा झँडा छीन कर भारत माता को भगवा ध्वज पकड़ा दिया है । राष्ट्र भक्त होते हुए भी हम क्यो कहें इनके भगवे ध्वज वाली माता की जय ? भारत माता की भगवे ध्वज वाली तसवीर देख कर आप स्वयं यह फैसला करें कि साँप्रदायिक किसे कहा जाता है ? और भगवे ध्वज वाली इनकी माता की जय हम कैसे बोल सकते है ?
इन्दर जीत सिंघ कानपुर
 

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